Chabahar Port: A Strategic Asset or a Source of Tension Between India and Iran?
Chabahar Port has been a cornerstone of India-Iran friendship, but recent budget decisions have raised concerns about its future. With the U.S. sanctions impacting Iran, the port's strategic importance is under scrutiny. Eiran's foreign minister expresses disappointment over India's budget allocation, emphasizing the port's potential to connect India with Central Asia and Europe. This article delves into the evolving dynamics of India-Iran relations and the implications for the Chabahar project.
| Feb 27, 2026, 12:47 IST
The Significance of Chabahar Port
चाबहार पोर्ट भारत और ईरान के बीच मित्रता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। दोनों देशों ने मिलकर इस पोर्ट का विकास किया है। हालाँकि, अब यह पोर्ट विवाद का कारण बनता दिख रहा है, क्योंकि भारत ने अपने इस साल के बजट में चाबहार परियोजना के लिए कोई फंड आवंटित नहीं किया है। इसका मतलब है कि भारत ने इस परियोजना के लिए कोई वित्तीय सहायता नहीं रखी। चाबहार पोर्ट की रणनीतिक महत्ता इसलिए है क्योंकि यह हिंद महासागर क्षेत्र को मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ता है, और भारत को पाकिस्तान को बाईपास करते हुए ईरान और अफगानिस्तान तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण मार्ग प्रदान करता है。
Concerns Over U.S. Sanctions
हालांकि, अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए लगातार प्रतिबंधों के कारण भारत चाबहार परियोजना के प्रति सतर्कता दिखा रहा है। जब ईरान के विदेश मंत्री से इस विषय पर सवाल किया गया, तो उन्होंने निराशा व्यक्त की। उनका कहना था कि यह स्थिति दोनों देशों के लिए निराशाजनक है। उन्होंने चाबहार को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बंदरगाह बताया और कहा कि इसका पूर्ण विकास भारत को ईरान से मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ने में मदद कर सकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि एक दिन इस बंदरगाह का पूरा विकास संभव होगा।
Evolving Relations
ईरान के विदेश मंत्री ने इस इंटरव्यू में भारत और ईरान के बीच मजबूत संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आत्मीयता है। हालांकि, उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।
