प्रधानमंत्री मोदी का इजराइल संसद में ऐतिहासिक संबोधन: आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी का इजराइल में संबोधन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को इजराइल की संसद, नेसेट में अपने ऐतिहासिक भाषण में गाजा शांति पहल को क्षेत्र में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का मार्ग बताया। उन्होंने इजराइल के प्रति एकजुटता का एक मजबूत संदेश देते हुए कहा कि "आतंकवाद कहीं भी हो, यह सभी जगह की शांति के लिए खतरा है।"
मोदी ने यह भी कहा कि इजराइल की तरह भारत भी आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करने की एक "सुसंगत और अडिग नीति" अपनाता है, जिसमें कोई दोहरा मापदंड नहीं है।
उन्होंने इस खतरे का सामना करने के लिए निरंतर और समन्वित वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी इजराइल की प्रतिनिधि सभा, नेसेट को संबोधित करने से पहले बेन गुरियन हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
मोदी ने कहा, "मैं सात अक्टूबर (2023) को हमास द्वारा किए गए बर्बर आतंकवादी हमले में जान गंवाने वाले हर व्यक्ति और उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।"
उन्होंने आगे कहा, "हम आपकी पीड़ा को समझते हैं। हम आपके शोक में आपके साथ हैं। भारत इस समय और भविष्य में भी पूरी दृढ़ता के साथ इजराइल के साथ खड़ा है। कोई भी कारण नागरिकों की हत्या को जायज नहीं ठहरा सकता। आतंकवाद को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता।"
यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का नेसेट में दिया गया पहला भाषण है, जिसमें मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया। इस कार्यक्रम में इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और कई अन्य वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे।
उन्होंने कहा, "भारत ने भी लंबे समय तक आतंकवाद का दर्द सहा है। हमें 26/11 मुंबई हमले और उसमें जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों की याद है, जिनमें इजराइली नागरिक भी शामिल थे।"
मोदी ने कहा, "आपकी तरह, हमारी भी आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की एक दृढ़ और अटल नीति है और इसमें कोई दोहरा मापदंड नहीं है।" उन्होंने यह भी कहा, "आतंकवाद का उद्देश्य समाजों को अस्थिर करना, विकास को बाधित करना और विश्वास को कमजोर करना है। आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सतत और समन्वित वैश्विक कार्रवाई आवश्यक है, क्योंकि आतंकवाद हर जगह शांति के लिए खतरा है।