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Confusion Surrounds U.S. Justification for Iran Conflict

The ongoing conflict between the U.S. and Iran has led to significant confusion within the U.S. government, with conflicting statements from President Trump, Vice President Vance, and Senator Rubio. As the administration struggles to articulate clear reasons for military action, questions arise about America's role and motivations in this conflict. The implications of potential ground troop deployments and the historical context of U.S. military interventions further complicate the situation. This article delves into the contradictions and uncertainties surrounding the U.S. approach to Iran, raising critical questions about the future of this conflict.
 

Internal Confusion Over Iran Conflict

अमेरिका के भीतर ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को लेकर भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। राष्ट्रपति की बातें अलग हैं, उपराष्ट्रपति की राय भिन्न है, और विदेश मंत्री एक नई कहानी पेश कर रहे हैं। ट्रंप प्रशासन को खुद नहीं पता कि उसने इस बड़े युद्ध की शुरुआत क्यों की। क्या अमेरिका ईरान के संभावित प्रतिशोध से डर गया है? 2 मार्च को प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट था कि यदि ईरान पर अमेरिका या इजराइल द्वारा हमला किया जाता है, तो ईरान जवाबी कार्रवाई करेगा और अमेरिका को निशाना बनाएगा। हमें पता था कि इजराइल ईरान पर हमला करने वाला है, और इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी सेना पर हमले होंगे। इसलिए, हमने पहले ही उन पर हमला कर दिया। इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका को इजराइल के कारण इस युद्ध में शामिल होना पड़ा। लेकिन ईरान पर हमले के समय ट्रंप ने कुछ और ही कारण बताए थे।


Trump's Justifications and Questions Raised

ट्रंप ने कहा था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहा है और लंबी दूरी की मिसाइलें बना रहा है, जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए खतरा हैं। इसलिए हमने यह ऑपरेशन शुरू किया है ताकि उनके न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम को नष्ट किया जा सके। ट्रंप ने इजराइल के संभावित हमले का कोई उल्लेख नहीं किया। अब सवाल उठता है, क्या अमेरिका इजराइल के निर्णयों का बंधक बन गया है? इजराइल के संभावित एक्शन की सजा अमेरिका ईरान को क्यों दे रहा है? क्या यह इजराइल का युद्ध है, जिसे अमेरिका अपने संसाधनों और सैनिकों की जान जोखिम में डालकर लड़ रहा है? ट्रंप ने ईरान की जनता से कहा कि यह उनकी आजादी का समय है। जब बमबारी रुक जाए, तो अपनी सरकार को अपने हाथ में ले लें।


Contradictions Among U.S. Officials

जब रूबियो से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि हमारा काम सिर्फ मिसाइलों को नष्ट करना है। अगर सरकार गिर जाती है, तो हमें कोई आपत्ति नहीं होगी। यह विरोधाभास कैसे है? यह भ्रम केवल ट्रंप और रूबियो तक सीमित नहीं है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ट्रंप इस देश को लंबे युद्ध में नहीं धकेलेंगे जिसका कोई स्पष्ट उद्देश्य नहीं है। लेकिन जब रूबियो से पूछा गया कि युद्ध कब तक चलेगा, तो उन्होंने कहा कि हम तब तक लड़ते रहेंगे जब तक जरूरत हो। वहीं, ट्रंप संकेत दे रहे हैं कि वह युद्ध को और लंबा खींच सकते हैं।


Concerns Over Ground Troops and Historical Context

ट्रंप ने पहले ही जमीनी सेना उतारने के विकल्प को खुला रखा है, जबकि रूबियो का कहना है कि हम अभी जमीनी सेना उतारने की स्थिति में नहीं हैं। इतिहास बताता है कि जब भी अमेरिकी सेना बिना किसी स्पष्ट उद्देश्य के किसी देश में उतरी है, वह वर्षों तक फंसी रही है। वियतनाम, अफगानिस्तान और इराक इसके उदाहरण हैं। वहां भी तबाही के अलावा कुछ नहीं मिला। इसलिए अमेरिकी मीडिया और विपक्षी डेमोक्रेट्स भी अब सवाल पूछ रहे हैं। फाइनेंशियल टाइम्स ने लिखा है कि डोनाल्ड ट्रंप ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्होंने मध्य पूर्व में एक और युद्ध क्यों शुरू किया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि पिछले 72 घंटों में ट्रंप प्रशासन युद्ध की चार अलग-अलग वजहें बता चुका है। यह स्पष्ट है कि अमेरिका इस युद्ध के परिणाम और आगे की योजना को लेकर पूरी तरह भ्रमित है। ईरान के लगातार प्रतिशोध और मिसाइल हमलों ने ट्रंप प्रशासन की बेचैनी बढ़ा दी है। युद्ध शुरू करना आसान होता है, लेकिन उसे समाप्त करना उतना ही कठिन।