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Bangladesh's Political Turmoil: A Suspense Thriller Unfolds

The political landscape in Bangladesh has turned into a suspenseful drama following Sheikh Hasina's departure. President Mohammad Shahabuddin's recent allegations against the interim government led by Yunus have sparked significant controversy. With claims of a missing resignation letter and accusations of unconstitutional actions, the situation is heating up. The involvement of Jamaat-e-Islami and its student wing raises questions about the future of governance in the country. As the 2026 elections approach, the battle between constitutional legitimacy and political reality intensifies. Discover the intricate details of this unfolding saga.
 

Political Drama in Bangladesh

बांग्लादेश की राजनीति इन दिनों एक सस्पेंस थ्रिलर की तरह बन गई है। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद भी 'इस्तीफे के पत्र' और 'असंवैधानिक सरकार' जैसे मुद्दों पर विवाद जारी है। ताजा घटनाक्रम में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन और कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के बीच टकराव हुआ है।


हाल ही में राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने एक साक्षात्कार में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर तीखे आरोप लगाए। उनके खुलासे ने ढाका से दिल्ली तक सबको चौंका दिया। राष्ट्रपति ने यूनुस सरकार के कई निर्णयों को संविधान के खिलाफ बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें 'हाउस अरेस्ट' में रखा गया था, इलाज के लिए विदेश जाने से रोका गया और कई बार राष्ट्रपति पद से हटाने की कोशिश की गई।


उन्होंने अमेरिका और यूनुस सरकार के बीच एक 'गुप्त' समझौते का भी दावा किया। राष्ट्रपति ने कहा कि यूनुस सरकार ने अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौता किया, जिसके बारे में उन्हें अंधेरे में रखा गया। इन बयानों के बाद जमात-ए-इस्लामी के नेता शफीकुर रहमान ने राष्ट्रपति को फेसबुक पर जवाब दिया।


The Mystery of the Missing Resignation

रहमान ने कहा कि 5 अगस्त को राष्ट्रपति ने कहा था कि उन्हें इस्तीफा मिल गया है, लेकिन अब वह कह रहे हैं कि उनके पास इसका कोई सबूत नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि राष्ट्रपति उस दिन कुछ और कह रहे थे और अब क्यों बदल रहे हैं।


यह विवाद 'रेजिग्नेशन लेटर' के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसका कोई अता-पता नहीं है।


  • अगस्त 2024: राष्ट्रपति ने कहा, "हसीना ने इस्तीफा दे दिया है और मुझे मिल गया है।"
  • अक्टूबर 2024: राष्ट्रपति ने कहा, "मैंने बहुत ढूंढा पर इस्तीफा नहीं मिला, शायद हसीना को साइन करने का वक्त ही नहीं मिला।"


यहां से यूनुस सरकार और जमात-ए-इस्लामी राष्ट्रपति को घेर रहे हैं, क्योंकि अगर इस्तीफा नहीं है, तो वर्तमान सरकार की वैधता पर सवाल उठते हैं।


The Alleged Nexus Between Yunus and Extremists

बांग्लादेश में यह चर्चा आम है कि शेख हसीना को हटाने में जमात-ए-इस्लामी और उसके छात्र संगठन 'छात्र शिविर' का बड़ा हाथ था। 2026 के चुनावों से पहले, यह स्पष्ट है कि आंदोलनकारी छात्र नेता अब जमात के करीब जा रहे हैं।


दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई छात्र नेता अब यूनुस की कैबिनेट में मंत्री बन चुके हैं। राष्ट्रपति का यह कहना कि वह केवल सेना और विपक्षी पार्टी BNP के समर्थन पर निर्भर हैं, वहां के सत्ता संघर्ष की भयावह तस्वीर पेश करता है।


बांग्लादेश में वर्तमान में 'संविधान' और 'हकीकत' के बीच संघर्ष चल रहा है। एक ओर वह सरकार है जो आंदोलन से निकली है, और दूसरी ओर राष्ट्रपति हैं जिन्हें शेख हसीना ने नियुक्त किया था। देखना होगा कि 2026 के चुनाव तक यह स्थिति कैसे बदलती है।