गौमूत्र के स्वास्थ्य लाभ: जानें कैसे यह आपके लिए फायदेमंद हो सकता है
गौमूत्र का महत्व
हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, इसलिए इसके गोबर और मूत्र को पवित्र माना जाता है। आयुर्वेद में गौमूत्र का उपयोग औषधियों के निर्माण में किया जाता है।
गौमूत्र के सेवन के फायदे
गौमूत्र का नाम सुनकर कई लोग नाक-भौं सिकोड़ते हैं, लेकिन इसके नियमित सेवन से कई गंभीर बीमारियों का इलाज संभव है। इसका स्वाद गरम, कसैला और कड़क होता है, जो विष नाशक और जीवाणु नाशक गुणों से भरपूर है। इसमें नाइट्रोजन, कॉपर, फॉस्फेट, यूरिक एसिड, पोटैशियम, क्लोराइड और सोडियम जैसे तत्व होते हैं।
गौमूत्र से लगभग 200 बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। गर्भवती गाय का मूत्र विशेष हार्मोन और खनिजों से भरपूर होता है, जो इसे और भी प्रभावी बनाता है। यह दर्द, पेट, त्वचा, श्वसन, आंत्रशोथ, पीलिया, नेत्र रोग, और मूत्र संबंधी समस्याओं के उपचार में सहायक है।
गौमूत्र के अन्य लाभ
गौमूत्र का सेवन दिल की बीमारियों, मधुमेह, कैंसर, टीबी, मिर्गी, एड्स और माइग्रेन जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में भी मदद कर सकता है। इसलिए गाय के दूध, दही और मठ्ठा के साथ गौमूत्र का सेवन करने से अनेक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।
गौमूत्र का सेवन कैसे करें
किस गाय का गौमूत्र नहीं पीना चाहिए?
बूढ़ी, अस्वस्थ या गर्भवती गाय का मूत्र नहीं लेना चाहिए। गौमूत्र को कांच या मिट्टी के बर्तन में लेकर साफ सूती कपड़े से छानकर खाली पेट पीना चाहिए।
गौमूत्र के अन्य उपयोग
गौमूत्र कीटनाशक के रूप में भी काम करता है। इसे पानी में मिलाकर उपयोग करें।
गौमूत्र, त्रिफला और गाय के दूध का मिश्रण एनीमिया को दूर करने में मदद करता है।
एक गिलास पानी में चार बूंद गौमूत्र, दो चम्मच शहद और एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर पीने से मोटापा कम होता है।
गौमूत्र पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और बीमारियों से बचाव होता है।
गौमूत्र का सेवन करते समय ध्यान देने योग्य बातें
गौमूत्र को मिट्टी, कांच या स्टील के बर्तन में ही रखें।
इसे हमेशा निश्चित तापमान पर रखना चाहिए।
8 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को गौमूत्र अर्क वैद्य की सलाह के अनुसार ही दें।
गौमूत्र की मात्रा ऋतु पर निर्भर करती है, गर्मियों में इसकी मात्रा कम लेनी चाहिए।